रविवार, 26 अप्रैल 2026

वापस! [#Wapas]

 परवाह नहीं 

तुम मुझे गालियां दो 

मैं वापस कर दूँगा. 

जो [#Jo]

 मैंने जो चाहा 

वह मिला 

जो मैंने चाहा ही न था. 

2- 

जो लोग 

कुछ ज्यादा जानते हैं 

वह कुछ ही जानते हैं 

बाकी तो 

मुगालता पालते है.  

3- 

मैं जो हूँ 

वह हूँ

आप भ्रम मे हैं. 

4. 

पशु और मनुष्य मे 

जो अन्तर होता है 

वह 

नर पशु मे नही होता.

रविवार, 29 मार्च 2026

माँ का आँचल !

तपती धूप

गोद से चिपका दुबला बच्चा 

पसीना पसीना होती माँ

को प्यास लगने लगी 

वह पानी की तलाश में

इधर उधर देखने लगी 

तभी बच्चा रोने लगा 

उसकी छाती टटोलने लगा 

बच्चे को भूख लगी थी 

माँ अपनी प्यास भूल कर

धूप में ही बैठ कर 

सड़क किनारे 

बच्चे को दूध पिलाने लगी 

माँ के सर पर धूप थी 

बच्चे के सर पर माँ का आँचल। 

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

माँ का दूध, बच्चे की प्यास !

 बच्चा रो रहा था 

भूख से, 

प्यास से नहीं।  

बोला- माँ भूख लगी है, 

कुछ खिला। 

घर में कुछ  नहीं था 

आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,  

रोटी कहाँ से लाती !

कनस्तर पलटा 

थोड़ा आटा आ गिरा 

माँ ने उसे पानी में घोला '

खूब फेंटकर बच्चे को दिया 

बच्चा समझदार था 

जानता था

 यह दूध नहीं 

फिर भी कटोरा पकड़ा 

पी गया गटागट 

मुंह पोछता हुआ माँ से बोला- माँ,

मैं दूध का स्वाद जानता हूँ, 

तूने मुझे खूब पिलाया है,

अपना दूध 

तेरी विवशता समझता हूँ  मैं 

किन्तु, अब मेरी प्यास बुझ गई है 

यह दूध पी कर !


 

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

'युवा पौंधा' !

एक  बीज 

पहले बोया गया 

अंकुरित हुआ,

पौंधा बना 

कई साल बाद 

एक पूरा पेड़ 

लहलहाता, हरा भरा 

घमंड से भरपूर 

फल रहे फलों को फेंक देता 

कह कर - मुझ पर बोझ 

बेचारे फल 

पेड़ के तल पर पड़े पड़े 

सूख गए, बिखर गए 

उनके गर्भ में छुपे बीज भी बिखर गए

कुछ लहलहाते पेड़ के सामने 

धरा में समा गए 

वर्षा काल में 

अंकुरित हुए 

पौंधे बने 

फिर पूरे पेड़ 

ठीक, पहले पेड़ की तरह 

किन्तु, तब तक 

वह पेड़  वृद्ध हो चुका था 

जर्जर और क्लांत 

अपने अंतिम समय की ओर बढ़ता 

किन्तु, क्या 

इसे युवा पौंधा समझ पायेगा !

रविवार, 28 दिसंबर 2025

प्रकृति में नकारात्मकता !

जब आकाश से वर्षा हुई

इसे आकाश का रुदन बताया 

जब मेघों की गर्जना हुई 

इसे मेघों का क्रुद्ध गर्जन बताया 

जब सूर्य देव तीव्र ताप से चमके  

इसे सूर्य की अग्निवर्षा कहा 

जब आँधी चली 

तब कहा वायु देव क्रोधित हैं 

जब भूकंप आया 

कहा- धरती रुष्ट कि पाप बढ़ चले 

अरे, निर्विकार प्रकृति में इतनी 

विकृति ढूँढने वालों 

प्रकृति में प्रतिबिम्ब न देखो !

गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

सांता तुम!

 हे सांता! तुम 

एक ही दिन क्यों आते हों 

इतनी महँगी पोशाक पहन कर 

गरीबों के पास !

गरीब और गरीबी तो 

तीन सौं पैंसठ दिन की हैं 

बाकी की 364 दिनों का क्या!

सोचना जरा!!

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...