नन्हा एलियन भटक रहा था इधर उधर ! रात का अँधेरा। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। सोच रहा था- यह कहाँ छूट गया मैं।
रात कुछ एलियन अपने यान में घूम रहे थे। पृथ्वी का एक टुकड़ा बिंदु बिंदु जगमगा रहा था। बड़ा अनूठा दृश्य था। उन्हें इसे निकट से देखना रोचक लगा।
उन्होंने अपना यान नीच उतारा। बिंदु इधर उधर भाग रहे थे। यह कैसा चमत्कार !
वास्तव में, वह जगमगाते बिंदु, जुगनू थे। हिलती डुलती आकृतियों को देख कर, जुगनू भागने लगे थे। एलियन इसे चमत्कार समझ रहे थे।
उस एलियन झुण्ड में, एक छोटा एलियन भी था। दो फुट का। वह भाग रहे जुगनुओं को पकड़ने उनके पीछे भागने लगा। वह उन्हें पकड़ कर अपने ग्रह में ले जाना चाहता था।
पृथ्वी पर यह अनूठा दृश्य देख कर मुग्ध एलियंस को समय का ध्यान ही नहीं रहा। सुबह होने को थी। उन्हें सूरज की पहले किरण से पहले ही पृथ्वी को छोड़ देना था। पृथ्वी के प्राणी, उनसे भयभीत हो कर,उन्हें हानि पहुंचा सकते थे।
सभी एलियंस जल्दी जल्दी अपने यान की ओर भागने लगे। और अपने यान में घुस गए।
अंदर जा कर उन्हें पता चला कि छोटा एलियन नहीं है। उन्होंने यान में उसे खोजा। किन्तु, छोटा एलियन कहीं नहीं था।
दो तीन बड़े एलियन यान से नीचे उतर कर छोटे एलियन को खोजने लगे। वह उसे पुकार रहे थे - एलांस एलांस ! तुम कहा हो !
किन्तु, एलांस बहुत दूर निकल गया था। वह जुगनुओं के पीछे भागता चला जा रहा था। उसे अपने पिता भाई की आवाज तक नहीं सुनाई दे रही थी ।
सूरज की पहली किरण फूटने वाली थी। यह एलियंस के लिए संकटपूर्ण होता। इसलिए, निराश एलियंस वापस यान में चले गए। यान अंतरिक्ष की ओर उड़ चला।
लाल लाल सूरज को सामने देख कर छोटा एलियन सहम गया। यह नीचे से ऊपर उठती आकृति क्या है ? उसे समझ नहीं आ रहा था। वह भागता हुआ एक घने पेड़ के नीचे बैठ गया।
वह चरवाहों का एक गाँव था। चरवाहे, गाय, बकरी और भेड़ें पालते थे। इन पशुओं का दूध बेच कर वह अपना जीवन यापन करते थे। भेड़ों की ऊन से, वह स्वयं और अपने परिवार के लिए सर्दियों के कपडे बना लिया करते थे। ऊन बचने पर उनसे बने वस्त्र बेच कर भी गुजारा किया जाता था।
चरवाहों के बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। क्योंकि, आसपास कोई विद्यालय था भी नहीं। उनके बच्चे दिन भर खेलते कूदते रहते थे। इसलिए उन्हें पशुओं को चराने का काम सौंप दिया गया था। यह काम चरवाहा बच्चों को भी खूब पसंद आया था। क्योंकि, इससे उन्हें खूब खेलने और पास के पेड़ों पर लगे फलों को खाने का अवसर भी मिल जाता था।
चरवाहा बच्चों ने पेड़ के नीचे बैठे एलियंस बच्चे को देखा। वह थोड़ा भयभीत हुए। गाये रम्भाने लगी। भेड़ बकरियां भी चिल्लाने लगीं। सभी एलियंस बच्चे को घेर कर खड़े थे।
एलियंस बच्चे ने, अपने सामने भिन्न और विचित्र आकृतियों वाले जीवों को देखा। वह डर गया। जोर जोर से रोने लगा।
चरवाहा बच्चों को कुछ समझ नहीं आ रहा था। हमे देख कर वह क्यों रो रहा था। जबकि, वह खुद उससे डरे हुए थे। वह चकित से उसे देखते रहे।
ऐसे ही कुछ समय बीत गया ।
चरवाहा बच्चों में एक बड़ा बच्चा समझदार था। वह एलियंस के पास गया। उसने पूछा - तुम कौन हो ? कहाँ से आये हो ? तुम्हारा नाम क्या है ?
एलियंस को भाषा समझ में नहीं आई। वह चुपचाप उन्हें देखता रहा। इस पर चरवाहा बच्चे क्रोधित हो कर उस पर चिल्लाने लगे। बड़े बच्चे ने उन्हें शांत कराया।
उसने फिर अपना सवाल एलियंस के सामने रखा। तभी एलियंस बच्चे को ध्यान आया कि उसके पास एक ऐसा यन्त्र है, जो किसी भी ध्वनि को उसकी भाषा में परिवर्तित कर सकता है और उसी भाषा में उत्तर भी दे सकता था। उस ने अपना यन्त्र खोल लिया।
चरवाहा बच्चे का प्रश्न समझ कर एलियंस ने उत्तर दिया - मेरा नाम एलांस है। मैं अंतरिक्ष के एलियंस ग्रह से आया हूँ।
बच्चों को यह पहेली समझ में न आई। विचित्र नाम एलांस। एलियंस, अंतरिक्ष और एलियंस ग्रह। यह तमाम शब्द उनकी समझ से बाहर थे।
फिर भी उन्होंने एलियन से पूछा - तो तुम यहाँ कैसे आये ? तुम्हारे साथ और कौन है ?
एलांस ने उन्हें सब सच बता दिया।
बच्चों को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने फिर पूछा - हम कैसे मान लें ! क्योंकि, सुदूर अंतरिक्ष में कई जीव रहते है। कहीं तुम कोई राक्षस तो नहीं !
एलांस सहम कर बोला- नहीं नहीं ! ऐसा नहीं है। तुम्हारी पृथ्वी के चारों और हजारों ग्रह और नक्षत्र है। लगभग, प्रत्येक ग्रह में कोई न कोई जीव है। मैं भी उनमें से एक हूँ। ठीक तुम लोगो की तरह। किन्तु, भिन्न आकृति वाला।
बच्चे मानने को तैयार नहीं थे। वह बोले - हम कैसे मान लें। हमने तो पहले कभी ऐसा नहीं देखा सुना। तुम झूठ बोल रहे हो !
एलांस बोला- तुम्हे मालूम ही क्या है ? क्या तुम जानते हो कि तुम्हारा भारत देश भी चाँद पर अपना यान भेज चुका है। अब वह एक इंसान को भेजने वाला है। तुम्हारी पृथ्वी के कई देश सूर्य के निकट जाना चाहते है।
चरवाहा बच्चे चकित थे। इस बच्चे को हमारी पृथ्वी का इतना ज्ञान ! हम लोग कुछ भी नहीं जानते।
अब बच्चों ने पूछा- तुम अब अपने घर कैसे वापस जाओगे? क्या तुम्हारे लोग तुम्हे लेने वापस आ सकते है?
एलांस बोला - सूरज डूबने के बाद, वह मुझे ढूंढने वापस आएंगे। किन्तु यहाँ आएंगे, मैं कह नहीं सकता। क्योंकि, हम लोग जहाँ उतरे थे, मैं उस जगह से काफी दूर आ चुका हूँ।
बच्चों ने एलांस को आश्वस्त किया- तुम घबराओ नहीं। हम तुम्हारे साथ ही रहेंगे। तुम्हे को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
एलांस आश्वस्त हुआ। बोला- धन्यवाद मित्रों।
बड़े बच्चे ने पूछा- तुम्हे भूख लगी होगी ! क्या खाते हो तुम लोग ?
एलांस ने बताया- हम लोग जब अंतरिक्ष की सैर को निकलते है, तब अपना भोजन एक कैप्सूल में परिवर्तित कर रख लेते है। मेरे पास ऐसे बहुत से कैप्सूल है। मैं उन्हें ही खाऊंगा।
सभी बच्चों को भूख लग आई थी। सभी ने, अपनी पोटली से खाना निकलना शुरू कर दिया। वह सभी, एलांस के साथ, उसी पेड़ के नीचे खाने लगे। एलांस ने भी अपना एक कैप्सूल खा लिया।
शाम होने को थी। बच्चों ने आपस में बात की। उन्हें वापस घर जाना होगा। किन्तु, एलांस को अकेला नहीं छोड़ सकते। इस पर सभी बच्चों ने निर्णय किया कि कुछ बच्चे पशुओं के साथ वापस जायेंगे। वह अपने बड़ों को सब बता कर, वापस आ जायेंगे।
एलांस जब तक वापस नहीं जा पाता, सभी बच्चे उसके साथ ही रहेंगे।
जब गाँव में बड़ों को मालूम हुआ तो वह भी चरागाह में आ गए। उन्होंने एलांस को देखा। विचित्र और आकर्षक जीव लगा। उन्होंने सोचा - हम इस जीव को पकड़ कर सरकार को सौंप देंगे। इससे उन्हें बढ़िया इनाम मिलेगा।
यह जान कर एलांस रोने लगा। चरवाहे बच्चे उसके चारों और एकत्र हो गए। उन्होंने, उसे शांत रहने को कहा।
सभी बच्चों ने, अपने बड़ों का विरोध किया। उन्होंने कहा- एलांस हमारी तरह ही किसी का बच्चा है। वह हमारा मित्र भी है। किसी दूसरे ग्रह से आये मित्र को हम नुकसान होने नहीं दे सकते। हम लोग इसे, इसके लोगों को सौंप कर ही घर वापस आएंगे।
बड़े निराश हो कर चले गए।
सभी बच्चों ने पूरी रात एलांस के छूटने वाली जगह ढूंढने का निर्णय किया। वह चारों ओर फ़ैल गए। वह जोर जोर से एलांस एलांस चिल्ला रहे थे। ताकि, एलांस के माता पिता इसे सुन कर उनके पास आ जाएँ।
इसका फल शीघ्र मिल गया। एलियंस, अपने यान में बैठ कर एलांस को खोजने आये थे। उन्होंने आवाज सुनी। वह नीचे उतरे। बच्चे उन्हें लेकर एलांस के पास आये।
अपने माँ पिता को देख कर एलांस उनसे लिपट गया। सभी एलियंस बहुत खुश हुए।
एलांस ने अपने लोगों को सभी बातें बता दी। वह चरवाहा बच्चों की इस परोपकारी भावना से बहुत खुश हुए। उन्होंने सभी चरवाहा बच्चों को अपने यान में बैठा कर अंतरिक्ष की सैर कराई। जाते समय उन्होंने सभी बच्चों को सुन्दर उपहार दिए।
चरवाहा बच्चों ने, दौड़ दौड़ कर कुछ जुगनू पकड़े। उन्हें एक बोतल में रख कर एलांस को भेंट किया। एलांस बहुत खुश हुआ।
अब दो ग्रहों के निवासी परस्पर अच्छे मित्र बन गए थे।







































