मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

'युवा पौंधा' !

एक  बीज 

पहले बोया गया 

अंकुरित हुआ,

पौंधा बना 

कई साल बाद 

एक पूरा पेड़ 

लहलहाता, हरा भरा 

घमंड से भरपूर 

फल रहे फलों को फेंक देता 

कह कर - मुझ पर बोझ 

बेचारे फल 

पेड़ के तल पर पड़े पड़े 

सूख गए, बिखर गए 

उनके गर्भ में छुपे बीज भी बिखर गए

कुछ लहलहाते पेड़ के सामने 

धरा में समा गए 

वर्षा काल में 

अंकुरित हुए 

पौंधे बने 

फिर पूरे पेड़ 

ठीक, पहले पेड़ की तरह 

किन्तु, तब तक 

वह पेड़  वृद्ध हो चुका था 

जर्जर और क्लांत 

अपने अंतिम समय की ओर बढ़ता 

किन्तु, क्या 

इसे युवा पौंधा समझ पायेगा !

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