बुधवार, 31 जुलाई 2019

इधर उधर, उधर इधर

बिल्ली आईचूहे भागे,
इधर उधर, उधर इधर
पानी बरसा, बूंदे बिखरी
इधर उधर, उधर इधर।
आंधी आई, पत्ते फैले 
इधर उधर, उधर इधर।
कुत्ता भौंका, पब्लिक भागी
इधर उधर, उधर इधर।

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

ग़ज़ल

मैंने कब भूलना चाहा था तुमको, 

तुम थे कि मुझे कभी याद न आये।

... 

चाहता था हमेशा  दोस्ती  करना तुमसे,


तुम दुश्मनी की रस्म निभा के चले गए।







रविवार, 21 जुलाई 2019

मॉं-बाप


जब, मॉं-बाप नहीं रहते

तब समझ पाता है आदमी ।

पिता की जिस लाठी से डरता था,

पिता को बुरा मानता था

आज समझ में आया

कि डराने वाली यही लाठी

सहारा बनती थी

गिरने पर,

लड़खड़ाने पर ।

बीवी के जिस आकर्षण में

मॉं के आँचल से दूर हो गया,

उसी से मॉं

चेहरे पर ठंडी हवा मारती थी,

पसीना पोंछ कर सहलाती थी,

छॉंव में चैन से सोता था ।

आज मॉं-बाप नहीं,

बच्चे है।

और मैं खुद हो गया हूँ-

मॉं-बाप ।

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...