शनिवार, 30 अप्रैल 2011

मैं मैंने

गालियों की शराब और मत फेकिये मुझ पर,
सब्र का पैमाना मेरा भर गया है।
ठहरिये आप क्या देखेंगे मुझे,
आपकी ओर पीठ कर ली है मैंने।
कहते कहते थक गया, आपने सुना नहीं,
अब मैं सो रहा हूँ, मुझसे पूछो न कुछ।
कल तुमने मुझे तमाशा बना दिया,
आज लोग तुम्हे देख रहे हैं।

बुधवार, 27 अप्रैल 2011

सीख

कभी वह दिन थे, जब हम चलते थे, हवाएं पनाह माँगा करती थीं।
आज यह दिन है कि एक तिनका भी राह रोके बैठा है।
हमने ताजिंदगी जिन्दगी को जीना सिखाया।
आज हमें मौत सीख देती है।

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के लडैत

अन्ना हजारे का अनशन समाप्त हो गया। ड्राफ्ट कमिटी बन गयी। ड्राफ्ट के सदस्यों में मतभेद उभर आये। दो सदस्य न्याय पालिका में कथित भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण स्कैन हो रहे हैं। भ्रष्टाचार के लडैत फिलहाल खुद ही भ्रष्टाचार में फंस गए। यानि कि अब हो चुकी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई। जय हो अन्ना बाबा की।

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

अन्ना आपके आमरण अनशन से नहीं मिटने वाला भ्रष्टाचार


क्या भ्रष्टाचार मिटाना इतना आसान है कि एक आदमी ने आमरण अनशन किया, सैकड़ों लोग उसके इर्दगिर्द खड़े हो गए, टीवी चंनेल्स के कैमरा तन गए, खूब फोटो खिंची, उसके बाद सब हाथ मिलाते हुए अपने अपने घर चले गए? नहीं.... ऐसे भ्रष्टाचार का राक्षस ख़त्म होने वाला नहीं। यह सतत लड़ाई है। यह बरसों चलेगी। ठीक वैसी ही लड़ाई जैसी महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों के साथ लड़ी थी। यह लड़ाई उनके एक अनशन के साथ पूरी नहीं हो गयी थी। उन्होंने बरसों इसे लड़ा। पर इससे पहले उन्होंने भारत को जाना, भारत के लोगों को जाना। अन्ना हजारे दिल्ली के बजाय यह लड़ाई मुंबई में या महाराष्ट्र में कहीं लड़ते तो अच्छा होता। यह लड़ाई वह बोर्ड ऑफ़ क्रिकेट कण्ट्रोल के विरुद्ध लड़ते, जिन्होंने क्रिकेट वर्ल्ड कप जैसे महा आयोजन में भ्रष्टाचार, ब्लैक मार्केटिंग को घुसेड दिया। यह लड़ाई शरद पवार के विरुद्ध लड़नी चाहिए थी, जिन्होंने अपने अमीर बोर्ड को मंत्री होने के नाते करोडो की टैक्स छूट दिलवा कर गरीब जानता के टैक्स का पैसा चूस लिया। यह लड़ाई मुंबई के उन लोगों के विरुद्ध लड़नी चाहिए थी जिन्होंने अपने मुफ्त में या कम दामों में मिले टिकेट भारत के फ़ाइनल में पहुंचते ही लाखों रुपये में बेच दिए और लोगों ने इन्हें खरीदा भी। अन्ना हजारे के लिए यह छोटी लड़ाई होती, पर वह इसमें विजयी होते तो क्रिकेट के बहाने पूरे भारत में अन्ना का सन्देश जाता। वह ज्यादा मज़बूत होकर उभरते। अन्ना ! आपके संज्ञान में ला दूं कि चाणक्य ने भारत को विशाल साम्राज्य बनाने के लिए पहले मगध के चारों ओर के छोटे छोटे राज्य जीते। सीधे मगध पर हमला नहीं कर दिया।

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...