सोमवार, 10 अप्रैल 2017

पहली बार

सांझ ढले
तुम आये
और जब गये
रात हुई
पहली बार। 

सवाल

सवाल यह नहीं
कि
तब क्या होगा
लोग क्या कहेंगे
मैं क्या कहूंगा
सवाल यह है
सबसे अहम् सवाल
कि,
तुम सवाल क्या करोगे ?

विचार

जहाँ जहाँ मैं गया
निशान छोड़ता गया
जहाँ मैं नहीं गया
वहां भी पहुंचा
एक मुंह से दूसरे मुंह
एक दिमाग से दूसरे दिमाग
पहुंच गया
विचार क़ी तरह 

तुम भ्रमित !

तुम्हे दिशा भ्रम होता
तो तुम
त्रिशंकु लटके होते
अंतरिक्ष में
यह तो मतिभ्रम है
जो औंधे पड़े हो
ज़मीन पर।  

तब तक [#TabTak]

  वह वापस आए  जो छोड़ गये थे  किन्तु, तब तक हम  आगे बढ़ चुके थे.