शनिवार, 25 अगस्त 2012

मुर्दे

मुझे पसंद हैं
मुर्दे !
जो
सोचते नहीं
मुंह खोलते नहीं
वह सांस रोके
निर्जीव आँखों से  देखते हैं
ज़िंदा आदमी का फरेब
जो देखता है,
सब कुछ समझता है
इसके बावजूद
जब
मुंह खोलता है
तब
न जाने कितने
ज़िंदा
मुर्दा हो जाते हैं।
शायद इसीलिए
देखते नहीं
मुंह खोलते नहीं
मुर्दे।

माँ का दूध, बच्चे की प्यास !

  बच्चा रो रहा था  भूख से,  प्यास से नहीं।   बोला- माँ भूख लगी है,  कुछ खिला।  घर में कुछ  नहीं था  आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,   रोटी कहाँ ...