रविवार, 29 मार्च 2026

माँ का आँचल !

तपती धूप

गोद से चिपका दुबला बच्चा 

पसीना पसीना होती माँ

को प्यास लगने लगी 

वह पानी की तलाश में

इधर उधर देखने लगी 

तभी बच्चा रोने लगा 

उसकी छाती टटोलने लगा 

बच्चे को भूख लगी थी 

माँ अपनी प्यास भूल कर

धूप में ही बैठ कर 

सड़क किनारे 

बच्चे को दूध पिलाने लगी 

माँ के सर पर धूप थी 

बच्चे के सर पर माँ का आँचल। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तब तक [#TabTak]

  वह वापस आए  जो छोड़ गये थे  किन्तु, तब तक हम  आगे बढ़ चुके थे.