जब आकाश से वर्षा हुई
इसे आकाश का रुदन बताया
जब मेघों की गर्जना हुई
इसे मेघों का क्रुद्ध गर्जन बताया
जब सूर्य देव तीव्र ताप से चमके
इसे सूर्य की अग्निवर्षा कहा
जब आँधी चली
तब कहा वायु देव क्रोधित हैं
जब भूकंप आया
कहा- धरती रुष्ट कि पाप बढ़ चले
अरे, निर्विकार प्रकृति में इतनी
विकृति ढूँढने वालों
प्रकृति में प्रतिबिम्ब न देखो !
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