शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

सड़क

सड़क अगर सोचती
कि, मैं
रोजाना ही
हजारों-लाखों राहगीरों को
इधर से उधर
उधर से इधर
लाती ले जाती हूँ।
अव्वल तो थक जाती
आदमी के बोझ से
दब जाती
या फिर
राहगीर चुनती
मैं इसे नहीं, उसे ले जाऊँगी
मगर सड़क
ऐसा नहीं सोचती
इसीलिए उसे
रोजाना रौंदने वाले
प्राणी
बेजान सड़क कहते हैं। 

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...