शनिवार, 3 सितंबर 2011

बादल का श्राप

              बादल का श्राप
एक बार
बेहद सूखा पड़ा,
अनाज पैदा होना बंद हो गया .
पानी के बिना
धरती का सीना तक फट गया
लोग दुआ करने लगे,
आसमान की ओर हाथ उठा कर, 
जार जार रोने लगे .
यह देख,
आसमान द्रवित हो उठा.
उसने बादल को बुलाया
धरती पर बरसने की आज्ञा दी. 
बादल पानी बरसाने लगा,
पानी इतना बरसा,
इतना बरसा
की बाढ़ आ गयी. 
धरती  जलमग्न हो गयी.
मवेशी मरने लगे
पहले घर डूबे,
फिर लोग डूबने लगे
प्रकृति का प्रकोप देख कर
लोग बिलखने लगे,
आसमान को कोसने लगे
मनुष्य का ऐसा चरित्र देख कर
आसमान ग्लानी से भर गया
उसकी आँखों में,
सतरंगी आंसूं झिलमिला रहे थे.
 यह देख कर बादल
 फूट फूट कर रोने लगा .

आंसुओं का खिलखिलाना

                      आंसुओं का खिलखिलाना
मुझे रोते रोते
खिलखिलाना अच्छा लगता है.
तुम भी देखो ऐसा करके,
सामने के तमाम दृश्य
तुम्हारे आंसुओं के बीच से होते हुए,
तुम्हारी खिलखिलाहट के साथ,
झिलमिलाने लगते हैं.

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