शनिवार, 17 सितंबर 2011

माँ की याद


                                                          माँ की याद
कल मुझे यकायक अपनी माँ की याद आ गयी. मुझे ही नहीं घर में सभी को यानि पत्नी और बेटी को भी याद आई. वजह कुछ खास नहीं. हम लोग घूमने निकल रहे थे. .. ठहरिये, आप यह मत सोचना कि हम उन्हें अपने साथ ले जाना चाहते थे. नहीं, ऐसा बिलकुल नहीं था. क्यूंकि वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं. अगर होती भी तो भी हम साथ नहीं ले जाते. कभी ले भी नहीं गए थे. बड़ी चिढ पैदा करने वाली माँ थी वह. दिन भर बोलती रहती. यह ना करो, वह न करो. बेटी को रोकती कि अकेली मत जा, ज़माना बड़ा ख़राब है. बेटी चिढ जाती. नए जमाने की आधुनिक, ग्रेजुएट लड़की थी वह.  उसे टोका  टाकी बिलकुल पसंद नहीं थी. चिढ जाती. भुनभुनाते हुए उनके सामने से हट जाती. माँ खाने में भी मीन मेख निकालती. बहु कैसा खाना बनाया है. बिलकुल बेस्वाद. कभी चारपाई से उठ कर चलने लगतीं और गिर जातीं. हम लोग चिल्लाते- भाई बिस्तर से क्यूँ उठती हो. चोट खाती हो. हम लोगों को भी परेशान होना पड़ता है. नाहक डॉक्टर के पास भाग दौड़ करो. तुम्हारी देख भाल करो. क्या कोई काम नहीं हमारे पास. माँ उदास हो जाती. कभी गाली बकने लगती. हमें बहुत बुरा लगता. कभी बात बहुत आगे बढ़ जाती. रोना धोना शुरू हो जाता. पत्नी झगड़ पड़ती- तुम्हारे कारण साथ रहना पड़ रहा है. अलग रहते. मौज करते. तुम्हारा छोटा भाई देखो अलग रह रहा है. मस्त है. मैं पत्नी को समझता कि यह संभव नहीं. पत्नी रूठ जाती. दिन भर बात नहीं करती. बर्तन बुरी तरह से पटकती. माँ फिर नाराज़ होने लगती. माहौल ज़बरदस्त तनाव से भर उठता. हम मन ही मन भगवान् से दुआ करते कि वह बीमार माँ को अपने पास बुला ले.
एक दिन माँ मर गयी. हम लोग बहुत रोये. मैंने उनका पूरा क्रिया कर्म किया. अपना सर तक मुंडवा लिया. सभी ने मेरी प्रशंसा की. देखा, कितना संस्कारी लड़का है. माँ के लिए सर मुंडवा लिया. माँ का पूरी श्रद्धा के साथ अंतिम क्रिया कर्म कर रहा है.
देखते ही देखते एक महीना बीत गया. आज हम सभी ने तय किया कि आज पिक्चर देखते हैं. तैयार हो कर निकलने लगे, तब ही हम सभी को माँ याद आ गयीं. वह होती थी तो हमें कोई दिक्कत नहीं होती थी. घर की फिक्र नहीं करनी पड़ती थी. बिना ताला डाले ही निकल जाते थे. माँ तो घर में थीं ना.
पत्नी बोली- माँ जी नहीं है. अब तो पड़ोस में कहना पड़ेगा कि घर का ख्याल रखें. नहीं तो चोरी हो जायेगी.
बेटी बोली- दादी थीं तो इसकी चिंता नहीं थी. फट से निकल लेते थे हम लोग. आज वह होती तो...
बेटी ने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया. हम सभी के दिमाग में माँ की याद गहरा रही थी. हम सभी माँ की याद में उदास हो गए.  

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...