रविवार, 15 सितंबर 2019

बेटा आ गया !


माँ ने कहा था

बेटा, जल्दी लौट आना

बेटा शहर गया

बेटे से मशीन बन गया

मशीन की खट खट में

माँ की पुकार खो गई

बरसों बीत गए

बेटा लौटा

हाथों में नोटों का थैला था 

लेकिन, माँ नहीं थी !

वह फोटो बन गई थी

बेटे ने चन्दन की माला चढ़ा दी

बोला - मैं आ गया माँ !

पांच हाइकू

घने बादल

लो सूर्यदेव झांके

आशा किरण।



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आकाश पंछी

छूना चाहे क्षितिज

लौट आना है।



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बहती हवा

उड़ती घटाएं भी

मनुष्य जैसे।



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सड़क गीली

घर- बाहर तक

तन भी गीला । 



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वृक्ष कहाँ हैं

चिड़िया बोले कैसे

हमारा घर।  

माँ का दूध, बच्चे की प्यास !

  बच्चा रो रहा था  भूख से,  प्यास से नहीं।   बोला- माँ भूख लगी है,  कुछ खिला।  घर में कुछ  नहीं था  आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,   रोटी कहाँ ...