शनिवार, 28 मई 2011

क्या बकवास है?

यह कौन सा शहर हैं यारों, जहाँ के रास्ते उलटे जाते हैं।
घरों को लौटते हुए लोग, घरों से दूर चले जाते हैं।
मैं सबसे छुपा हुआ था, रुसवाइयों के घेरे में।
लोग हंस रहे थे और मैं रो रहा था।
एक बार सोचो तुम कहाँ चले जाते हो,
लौटने की सोचते नहीं कि फिर लौट जाते हो।
चलो हटाओ कि जो हो गया सो हो गया,
राख हटती जाती है, मुर्दा नज़र आता है।
मैंने उन्हें अलविदा कहा, उन्होंने हाथ हिलाया
लौटा तो देखा कि पडोसी चला आ रहा था।

माँ का दूध, बच्चे की प्यास !

  बच्चा रो रहा था  भूख से,  प्यास से नहीं।   बोला- माँ भूख लगी है,  कुछ खिला।  घर में कुछ  नहीं था  आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,   रोटी कहाँ ...