बच्चा रो रहा था
भूख से,
प्यास से नहीं।
बोला- माँ भूख लगी है,
कुछ खिला।
घर में कुछ नहीं था
आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,
रोटी कहाँ से लाती !
कनस्तर पलटा
थोड़ा आटा आ गिरा
माँ ने उसे पानी में घोला '
खूब फेंटकर बच्चे को दिया
बच्चा समझदार था
जानता था
यह दूध नहीं
फिर भी कटोरा पकड़ा
पी गया गटागट
मुंह पोछता हुआ माँ से बोला- माँ,
मैं दूध का स्वाद जानता हूँ,
तूने मुझे खूब पिलाया है,
अपना दूध
तेरी विवशता समझता हूँ मैं
किन्तु, अब मेरी प्यास बुझ गई है
यह दूध पी कर !
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