शुक्रवार, 15 जून 2012

गाय



एक शहर की
वीरान और साफ सुथरी गली में
एक भूखी गाय घूम रही है
दोनों ओर घरों के बावजूद वीरानी है
क्यूंकि, घर के पुरुष ऑफिस चले गए हैं
और बच्चे स्कूल 
कामकाजी महिलायें भी निकल गयी हैं
घर में रह गए हैं
बूढ़े और निकम्मे
बूढ़े  सो गए हैं
उन्हे इससे मतलब नहीं
कि कोई गाय भूखी घूम रही है
निकम्मों के पास देने का कोई अधिकार नहीं होता
गाय को चाह है किसी बड़े से टुकड़े की
चाहे वह टुकड़ा रोटी का हो, दफ्ती का या कागज़ का
पॉलिथीन भी चल जाएगी,
अगर कुछ न मिले तो ।
मगर गाय को नहीं मालूम कि,
शहर अब साफ सुथरे रहने लगे हैं,
गलियाँ बिल्कुल गंदगी रहित हैं
कूड़ा नगर पालिका वाले उठा ले जाते हैं
बासी खाना भिखारी या घर में काम करें वाले नौकर
गाय सोच रही है-
कभी इस शहर में,
शहर की इस गंदी गली में
बेशक पीठ पर कुछ डंडे पड़ते थे
पर मुंह मारने को
इतना कुछ मिल जाता था
कि पेट भर जाता था
पीठ पर पड़े डंडों का
दर्द नहीं होता था।

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...