शनिवार, 9 जुलाई 2011

कितने प्रश्न !

ईश्वर का वरदान
एक दिन,
ईश्वर प्रकट हुए ।
बोले-
वत्स, तू मेरी दुनिया का
सबसे संतोषी प्राणी है।
मैं तुझसे बहुत खुश हूँ,
मांग, मुझसे क्या मांगता है?
तबसे
आज का दिन है,
मैं,
परेशानहाल घूम रहा हूँ,
यह सोचता हुआ
कि ईश्वर से क्या माँगूँ।
पूर्णविराम या फुलस्टॉप
वह बोले,
सब खत्म हो गया।
मैंने पूछा-
पूर्णविराम या फुल स्टॉप ?
सुख या दुख ?
मैंने
एक मरते आदमी की आँखों में झाँका,
घोर निराशा थी,     
मोह से पैदा हुई,
सब कुछ छूट जाने के कष्ट से।
उस आदमी ने,
बेहद खुशी खुशी,
ज़िंदगी भर कमाया था,
ढेरों पैसा, घर, बंगला और कार जमाया था ।
क्या इसीलिए कि
आज जब
यह मर रहा है,
तब दुनिया का सबसे दुखी प्राणी है।

रविवार, 19 जून 2011

मैं कौन हूँ ?

तुम मुझे जानते नहीं कि मैं कौन हूँ-
मैं वह तिनका हूँ, जो आँखों को रुला सकता है।
मैं वह आंसू हूँ, जो दिल को हिला सकता है।
मैं वह दिल हूँ, जो धड़कता है दूसरों के लिए,
जब नहीं धड़कता तो मौत को रुला सकता है।
मुझे जानने की ज़रुरत नहीं है तुमको,
मैं वह हूँ, जो तुमको तो सता सकता है।
आस्तीन के साँपों को पहचानते नहीं तुम,
मैं वह हूँ जो तुमको बता सकता है।

उन बच्चों के लिए जिनके पिता हैं

मैं लड़खड़ा कर गिर रहा था
कि एक उंगली ने मुझे सहारा दिया,
गिर कर सम्हलना सिखाया,
सीधा खड़ा होना और चलना सिखाया ।
फिर मैं दौड़ने लगा,
इतना तेज़ दौड़ा कि वह उंगलियाँ, वह हाथ,
कहीं बहुत पीछे छूट गए
मैं इस दौड़ में इतना भागा इतना भागा
कि जब पलट कर देखा तो
कहीं नज़र नहीं आये पिता ।

शनिवार, 28 मई 2011

क्या बकवास है?

यह कौन सा शहर हैं यारों, जहाँ के रास्ते उलटे जाते हैं।
घरों को लौटते हुए लोग, घरों से दूर चले जाते हैं।
मैं सबसे छुपा हुआ था, रुसवाइयों के घेरे में।
लोग हंस रहे थे और मैं रो रहा था।
एक बार सोचो तुम कहाँ चले जाते हो,
लौटने की सोचते नहीं कि फिर लौट जाते हो।
चलो हटाओ कि जो हो गया सो हो गया,
राख हटती जाती है, मुर्दा नज़र आता है।
मैंने उन्हें अलविदा कहा, उन्होंने हाथ हिलाया
लौटा तो देखा कि पडोसी चला आ रहा था।

गुरुवार, 5 मई 2011

दोस्तों

ज़िन्दगी को इतना प्यार न कीजिये कि छूटने से डर लगे।
साँसों को इतना प्यार न कीजिये कि टूटने से डर लगे।
जो बना है वह एक दिन बिखरेगा भी,
उदासियों को इतना गले न लगिए कि हंसने से भी डर लगे।
दोस्तों हम किसी से कहते नहीं,
कि हमें कहने से डर लगता है।
दोस्तों हम किसी से छुपते नहीं,
कि बाहर आने से डर लगता है।
अब दोस्तों कुछ ऐसा हो गया है,
हम छुपते नहीं और डर नहीं लगता है।

रविवार, 1 मई 2011

चुभन

दिन की चुभन कुछ ऎसी होती है,
कि चाँद की चांदनी भी सताया करती है।
हम रात भर करवटे बदलते हैं,
कि ख्वाबों की ताबीर सताया करती है।
इंसानों ने इस कदर बदला खुद को,
मौसम ने बदलना छोड़ दिया है ।
इंसानों की फितरत है कुछ ऎसी
कि फलों ने महकना छोड़ दिया है।

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

मैं मैंने

गालियों की शराब और मत फेकिये मुझ पर,
सब्र का पैमाना मेरा भर गया है।
ठहरिये आप क्या देखेंगे मुझे,
आपकी ओर पीठ कर ली है मैंने।
कहते कहते थक गया, आपने सुना नहीं,
अब मैं सो रहा हूँ, मुझसे पूछो न कुछ।
कल तुमने मुझे तमाशा बना दिया,
आज लोग तुम्हे देख रहे हैं।

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...