शनिवार, 9 जुलाई 2011

कितने प्रश्न !

ईश्वर का वरदान
एक दिन,
ईश्वर प्रकट हुए ।
बोले-
वत्स, तू मेरी दुनिया का
सबसे संतोषी प्राणी है।
मैं तुझसे बहुत खुश हूँ,
मांग, मुझसे क्या मांगता है?
तबसे
आज का दिन है,
मैं,
परेशानहाल घूम रहा हूँ,
यह सोचता हुआ
कि ईश्वर से क्या माँगूँ।
पूर्णविराम या फुलस्टॉप
वह बोले,
सब खत्म हो गया।
मैंने पूछा-
पूर्णविराम या फुल स्टॉप ?
सुख या दुख ?
मैंने
एक मरते आदमी की आँखों में झाँका,
घोर निराशा थी,     
मोह से पैदा हुई,
सब कुछ छूट जाने के कष्ट से।
उस आदमी ने,
बेहद खुशी खुशी,
ज़िंदगी भर कमाया था,
ढेरों पैसा, घर, बंगला और कार जमाया था ।
क्या इसीलिए कि
आज जब
यह मर रहा है,
तब दुनिया का सबसे दुखी प्राणी है।

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