छुटकी ने अभी अभी ड्रॉइंग क्लास जॉइन की थी. रेखाओं को मिलाते हुए चित्र बनाना उसे भाता था. वह अपनी स्टडी टेबल पर बैठ कर सादे कागज पर रेखाएं खींचती रहती थी।
उसके इस प्रयास को माँ और पिता ने देखा। उन्हें लगा कि छुटकी ड्राइंग सीखना चाहती है। कला किसी भी बच्चे में सकरात्मक भाव पैदा करती है। उसमे कुछ करने की भावना पैदा करती है।
उन्होंने छुटकी से पूछा - बिटिया, क्या तुम्हे ड्राइंग बनाना पसंद है ? क्या तुम ड्राइंग सीखना चाहोगी ? तुम्हारा ड्राइंग स्कूल में एडमिशन करा दें।
छुटकी न सहमति में सर हिलाया। इस के बाद, छुटकी का एक ड्राइंग स्कूल में एडमिशन करवा दिया गया था।
छुटकी क्लास के बाद, घर आ कर अपनी मेज पर बैठ गयी . उसने ड्रॉइंग पेपर निकाला. पेंसिल को नुकीला बनाया. तभी सटीक चित्र बन सकता था.
छुटकी, ड्राइंग क्लास से वापस आने के बाद अपनी मेज पर बैठ गई। उसने ड्रॉर से अपना ड्राइंग बॉक्स निकला। बॉक्स में भिन्न प्रकार की पेन्सिलें थी। ड्राइंग के लिए यह बहुत आवश्यक है। साथ में इरेज़र और शार्पनर भी था। बारह इंच और छह इंच की पटरियां भी मेज पर सजा दी।
अब छुटकी ने सफेद ड्रॉइंग पेपर पर काली पेंसिल से रेखाएं बनानी शुरू कर दी। वह एक रेखा के साथ दूसरी रेखा को बनाती। उसने निरंतर, एक रेखा बनाई .उसके निकट दूसरी रेखाएं बनाई. फिर दो रेखाओं तीसरी रेखा से उन्हें मिलाना प्रारंभ कर दिया. वह एक रेखा से जोड़ते हुए दूसरी रेखा खींचने लगी। उसका यह प्रयास देर तक चलता रहा।
जब उसे लगा कि आकृति पूरी हो गई है तब उसने कागज अपनी आँखों के सामने रखा । हाँ, यह हाथी ही था। अर्थात, उसका हाथी बन गया था।
छुटकी देर तक अपनी बनाई आकृति देखती रही। वह स्वयं पर मुग्ध सी थी। मैंने अभी सीखना शुरू किया है। किन्तु, कितनी अच्छी आर्ट बना लेती हूँ मैं! वह आकृति को देर तक देखती रही।
यकायक, छुटकी को लगा आकृति हिल रही है। उसकी बनाई आकृति आकार लेने लगी थी। उसमे त्रिआयाम दिखने लगे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि कोई सजीव आकृति हिल रही थी।
यह देख कर छुटकी ने घबरा गई। उसने अपनी आँखे बंद कर ली। यह कैसा भ्रम ! वह सोच रही थी।
तभी उसे प्रतीत हुआ कि उसकी मेज पर कोई बैठा है। कौन हो सकता है !
छुटकी ने धीरे धीरे आँखे खोली। मेज पर कोई अनगढ़ आकृति बैठी हुई थी। वह हिल रही थी। बड़ा सा सर हिला डुला रही थी।
यह देख कर छुटकी की चींख निकल गई- अरे यह क्या ! तुम कौन हो !
इस पर आकृति बोली - मैं तुम्हारा हाथी हूँ छुटकी ! अभी अभी ही तो तुमने मुझे कागज पर उकेरा था।
छुटकी घबड़ा गई - तुम... और हाथी ! किसने बनाया तुम्हे ! क्या मैंने ! हाथी तो ऐसा नहीं होता है। तुम्हारा शरीर चारों तरफ से नुकीला है। सूंड, कान, पैर और पूँछ नुकीली है। पूरा शरीर बेडौल और टेढ़ा-मेढ़ा है।
हाथी बोला - हाँ ! तुम सही कह रही हो। लेकिन मैं हाथी ही हूँ। तुम्हारा बनाया हुआ हाथी। अभी ही तो तुमने अपनी नन्ही उँगलियों से मुझे ड्राइंग पेपर पर उकेरा था।
छुटकी के आंसू निकल आये। वह सोचने लगी -यह हाथी है! मैंने ऐसा हाथी बनाया ! हाथी कहीं ऐसा होता है ! कितनी ख़राब ड्राइंग है मेरी !
छुटकी की आँखों से आंसू टपा-टप गिरने लगे।
हाथी चौंक पड़ा। उसने सूंड उठा हलकी हवा छुटकी तरफ छोड़ी। बोला - तुम रो क्यों रही हो ? क्या मैं इतना बुरा हूँ ? किन्तु, मैं तो तुम्हारा हाथी हूँ। तुम्हारी रचना।
छुटकी, उदास स्वर में बोली - तुम इतने बुरे नहीं हो। मेरी ड्राइंग बुरी है। मैंने तुम्हे कितना बुरा गढ़ा है। हाथी जैसे लग ही नहीं रहे। जगह जगह से कोने निकले हुए है। कान, सूंड और पैर नोकदार है। ईश्वर का बनाया हाथी कहीं ऐसा होता है। मैं सचमुच बुरी आर्टिस्ट हूँ !
हाथी, ठहाका मार कर हंसा। छुटकी चकित सी उसे देखती रही। फिर बोली - तुम हंस क्यों रहे हो? मैंने कितनी बुरी ड्राइंग बनाई है, इस पर !
हाथी, गंभीर हो कर बोला - नहीं, तुम्हारी रचना पर नहीं। तुम्हारी ड्राइंग बुरी नहीं है। तुमने अभी ड्राइंग सीखना शुरू किया है। तुम अभी बहुत छोटी भी हो। तुम्हारे हाथों में अभी वह सफाई और नियंत्रण नहीं है। कोई भी रचना अभ्यास के साथ सुगढ़ बनती है। तुम प्रयास और अभ्यास करती रहो। मुझे तुम सुगढ़ हाथी बना दोगी।
बस तुम्हे करना इतना है कि पहले आँखे बंद कर मेरा ध्यान करो। मैं वास्तव में कैसा लगता हूँ, उसे सोचो। फिर उसके अनुसार पेंसिल से आउटलाइन बनाना शुरू करो। सर और शरीर का अनुपात, पैरों की मोटाई और नाखूनों का आकार, पूँछ की लम्बाई और कान का सूप आकर, सब अपने ध्यान में लाओ। मेरी आँखे शरीर के अनुपात में काफी छोटी होती है। ध्यान रखना। तुम कुछ प्रयास के बाद, अच्छा चित्र बनाने लगोगी।
छुटकी हाथी की बातें ध्यान से सुन रही थी। वह आश्वस्त लग रही थी कि वह निरंतर प्रयास और कल्पनाशीलता से अच्छी आकृतियां गढ़ सकती है।
छुटकी को संतुष्ट देख कर हाथी बोला - अच्छा छुटकी, अब मैं तुम्हारी आकृति बनने जा रहा हूँ। तुम फिर प्रयास करती रहना। मैं फिर मिलूंगा।
हाथी ड्राइंग पेपर में समा गया।
छटकी ने, पेंसिल नुकीली बनाई। इरेज़र उठाया। आकृति को सुगढ़ हाथी बनाने में जुट गई।