शनिवार, 25 जनवरी 2014

गणतंत्र की रस्सी

इस गणतंत्र दिवस पर
कभी फहराते झंडे,
उसे उठाये डंडे और लिपटी रस्सी को देखो
डंडा घमंड से इतराता है
कि उसने गणतंत्र का प्रतीक उठा रखा है
मगर भूल जाता है
अपने से  लिपटी उस रस्सी को
जो उसे नियंत्रित करती है
तथा उसकी मदद करती है
ऊंचा उठाने में

गणतंत्र के झंडे को.
अगर
रस्सी का नियंत्रण न होता

तो डंडा
ख़ाक फहरा पाता आसमान में झंडा
तार तार कर रहा होता
गणतंत्र के झंडे को
और खुद
मुंह तुड़वा लेता अपना।

रविवार, 5 जनवरी 2014

चौराहा : दो चित्र

चौराहे से
गुज़रते हैं ढेरों लोग
हर रोज .
चौराहा
वहीँ ठहरा रहता है
किसी के साथ जाता नहीं
इसलिए नहीं
कि
नहीं जाना चाहता
चौराहा
बल्कि,
पहचान बन गया है
इतने लोगों के गुजरने के बाद
चौराहा.
२-
चौराहे पर
लेटे हुए कुत्ते के
लात मार दी थी मैंने
साला, रास्ता छेंके लेटा था
दर्द से कराहता
दुम अन्दर कर
पीछे मुड़ मुड़ कर
मुझे देखता
भाग गया था कुत्ता
उस दिन रात
लौट रहा था मैं
सुनसान चौराहे पर
घेर लिया मुझे
लुटेरों ने
घड़ी, पर्स और चेन
सभी लूट लेते
कि तभी वही कुत्ता
भौंकता हुआ
टूट पडा था उन पर
भाग निकले थे वह लुटेरे
और मैं
चौराहा पार कर
पीछे मुड़ मुड़ कर
देख रहा था कुत्ते को
जो सोया पडा था
ठीक दिन की तरह
बीच चौराहे पर.

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

कुर्सी

वह खड़े थे
मेरी मुखालफत में
मैंने कुर्सी दी
वह बैठ गए.
२-
कुर्सी में
वह सिफत है यारों
बेपेंदी के लोटे भी
लुढक लेते है.
३-
कुर्सी  के
चार पाएं होते हैं
तभी तो
अच्छा खासा लीडर
लोमड़ी बन जाता है.
४- 
काम करने के लिए
होती है कुर्सी
मैंने
गद्दी लगा ली
और राज करने लगा
५-
कुर्सी
लकड़ी की होती है
तभी
पत्थर दिल
बैठ पाता  है
६-
'आप' को
कुर्सी मिली
'मैं' बैठ गया.


मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

खिड़की वाले सांता

बच्चे ने
माँ से कहा-
सांता क्लॉज़ आये
चले गए
हैप्पी न्यू इयर
आने वाले हैं
माँ
यह कौन लोग है
जिनके आने से
सामने का घर रोशन रहता है
हमारे यहाँ अँधेरा
माँ बोली-
यह बड़ों के बड़े लोग है
सांता का छोटा भाई
हैप्पी न्यू इयर है
जहाँ सांता जाता है
वहीँ हैप्पी भी
खुशियों का उपहार देने
सांता को चाहिए
एक अदद खिड़की
उपहार उड़ेलने के लिए
पर हमारे पास
छत तक नहीं.
इसलिए
सांता और हैप्पी
खिड़कियों वाले घर ही जाते हैं. 

शनिवार, 14 दिसंबर 2013

सर्दी में

सर्दी में जो लोग
कुछ नहीं पहनते
वह जाडा खाते हैं
लेकिन,
जो कपडे नहीं पहन पाते
जाड़ा उन्हें खा जाता है.
देखा,
सर्दी भी
कपड़ों का फर्क समझती है!          

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

जीवन

आँख खुली
भाव चेहरे पर आये
शब्द कुनमुनाए
आह ! सुबह हो गयी !!!
२-
हवा
चेहरा छूती
बदन सहलाती
बढ़ जाती
आगे
कहीं बहुत दूर
मुझसे
३-
सूरज निकला
चिड़ियाँ बोली
पहले एक इंसान ने
आँखें खोली
फिर दूसरे, तीसरे और...
जीवन जाग गया.
४-
ट्रेन
बस
जहाज
मनुष्य चलाता हा
मनुष्य बैठता है
तब
क्यों नहीं यह तीनों इंसान
क्योंकि, इनसे
मनुष्य  उतर जाता है .
५-
आदमी
आता है
आदमी
जाता है
जाने के बाद
फिर वापस आता है
तभी तो
एक मकान
घर बन जाता है.

तीन खिलौने

खिलौना
टूट गया
पर खेला कौन !
२-
खिलौना
आदमी की तरह
मिटटी का होता है
मिटटी में मिल जाता है .
३-
बेटी रो रही थी
मुझे याद आया
कभी मेरे हाथों से छूट कर
खिलौना टूट गया था
मैं इसी तरह
फूट फूट कर रो रहा था
मैंने बेटी को खिलौना ला दिया
बेटी मुस्कुरा पड़ी
पर मेरी आँखे गीली थीं
क्योंकि,
मुझे किसी ने
खिलौना नहीं दिया था.

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...