बुधवार, 23 नवंबर 2011

एक सौ हम

हम दोनों के बीच
लम्बे समय की संवादहीनता के कारण
बड़ा सा शून्य बन गया था.
पर हम
इस शून्य में उलझे नहीं
इससे खुद को गुणा नहीं किया
शून्य से खुद को घटाया नहीं
शून्य को बांटने की कोशिश भी नहीं की
क्यूंकि हर दशा में हम
खुद शून्य हो जाते
हम खुद भी  
शून्य के पीछे नहीं लगे
हमने शून्य को अपने पीछे लगाया
तब शून्य के कारण
दस गुणा समझदार हो गए हम
फिर हम मिले
न किसी को घटाया बढाया
न अपने से बांटा
जोड़ा भी नहीं
सिर्फ
एक दूसरे को गुणा किया
और एक सौ हो गए.


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