बुधवार, 27 अप्रैल 2011

सीख

कभी वह दिन थे, जब हम चलते थे, हवाएं पनाह माँगा करती थीं।
आज यह दिन है कि एक तिनका भी राह रोके बैठा है।
हमने ताजिंदगी जिन्दगी को जीना सिखाया।
आज हमें मौत सीख देती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तब तक [#TabTak]

  वह वापस आए  जो छोड़ गये थे  किन्तु, तब तक हम  आगे बढ़ चुके थे.