बुधवार, 21 मई 2025

....रोया न था !



आसमान घिरने लगा

 

बदल एकत्र होने लगे

 

मिल कर साथ घने होते चले गए

 

नीचे होते गए...और नीचे

 

आसमान से दूर

 

गिरते चले गए

 

यकायक पृथ्वी से कुछ दूर

 

बरसने लगे

 

आसमान साफ होने लगा

 

आसमान सोचने लगा

 

मुझसे दूर जा कर

 

बदल क्यों रोने लगे ?

 

वह समझ न सका !

 

वह  कभी रोया न था !

गुरुवार, 15 मई 2025

तीन हाइकू : भाव

 ग्रीष्म की धूप 

श्रमिक का पसीना

परास्त नहीं  !

२-

नभ में सूर्य 

यात्री संग श्रमिक

विश्राम नहीं। 


३- 

नभ में मेघ 

गली में खेलें बच्चे 

प्रसन्न मन । 


रविवार, 4 मई 2025

प्रकृति और जीवन : पाँच हाइकु

कक्ष में पक्षी 
अतिथि आये है 
अद्भुत स्वर ।

२ 
मेघ गर्जना 
मुन्ना रो पड़ता है 
जल वृष्टि ही ।

३ 
सूर्य ऊर्जा से 
विचलित पथिक 
छाँह कहाँ है !

४ 
प्रातः से साँय
घर लौटते लोग 
यही जीवन ।

प्राण निकले 
रो रहे परिजन
अब प्रारंभ ।

शुक्रवार, 2 मई 2025

दूध का उबाल !


 अपने से बिछुड़ने का दर्द 

दूध से पूछो 

जैसे जैसे पानी साथ छोड़ता है 

दूध उबाल खाने लगता है। 

रविवार, 27 अप्रैल 2025

सत्य

 सत्य 

भागता नहीं है 

हम उससे भागते है 

वह एक है 

अनंत है 

अकेला है

हमें उसका साथ देना है 

और साथ लेना भी है 

किन्तु आप विचलित हो रहे है 

भाग रहे हैं 

अपने सत्य से ।

अंततः अश्व: तीन हाइकु

अश्व की शक्ति 

मनुष्य का मस्तिष्क 

घर मे बंधा। 

अश्व की गति 

मनुष्य से स्पर्द्धा मे 

 कोसों दूर है ।

अश्व की निष्ठा 

मानव का विश्वास 

अश्व विजयी। 

मेरा शत्रु!

 मैंने 

अपने शत्रुओं से पूछा? 

मेरा सबसे प्रमुख शत्रु कौन है ? 

वह बोला- तू स्वयं! 

जो आस्तीन नहीं मोड़ता कभी !

Alien Alans and Shepherd Children!

 The tiny alien was wandering aimlessly in the darkness of the night. He couldn't understand anything. He was wondering, "Where did...