रविवार, 28 दिसंबर 2025

प्रकृति में नकारात्मकता !

जब आकाश से वर्षा हुई

इसे आकाश का रुदन बताया 

जब मेघों की गर्जना हुई 

इसे मेघों का क्रुद्ध गर्जन बताया 

जब सूर्य देव तीव्र ताप से चमके  

इसे सूर्य की अग्निवर्षा कहा 

जब आँधी चली 

तब कहा वायु देव क्रोधित हैं 

जब भूकंप आया 

कहा- धरती रुष्ट कि पाप बढ़ चले 

अरे, निर्विकार प्रकृति में इतनी 

विकृति ढूँढने वालों 

प्रकृति में प्रतिबिम्ब न देखो !

गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

सांता तुम!

 हे सांता! तुम 

एक ही दिन क्यों आते हों 

इतनी महँगी पोशाक पहन कर 

गरीबों के पास !

गरीब और गरीबी तो 

तीन सौं पैंसठ दिन की हैं 

बाकी की 364 दिनों का क्या!

सोचना जरा!!

माँ का दूध, बच्चे की प्यास !

  बच्चा रो रहा था  भूख से,  प्यास से नहीं।   बोला- माँ भूख लगी है,  कुछ खिला।  घर में कुछ  नहीं था  आज तो रोजी भी नहीं मिली थी,   रोटी कहाँ ...