शनिवार, 13 नवंबर 2021

कोहरा और पिता



शीत रात्रि के बाद

सूर्योदय से पहले 

पिता घर आते थे

द्वार खोलती थी माँ 

ओस से भीगे पिता 

और 

गति से अंदर आता कोहरा 

देख कर 

सिहर जाता मैं 

आज भी याद कर.

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  वह वापस आए  जो छोड़ गये थे  किन्तु, तब तक हम  आगे बढ़ चुके थे.