शनिवार, 6 नवंबर 2021

अनन्त आकाश

आकाश 

तुम अनन्त हो

शायद इसलिए

कि मैं तुम्हें

उस विस्तार तक देख नहीं सकता 

छू नहीं सकता 

अशक्तता मेरी 

अक्षमता मेरी 

मैं समझता हूँ 

तुम अनंत हो 

आकाश!

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